हा मै ही स्वतंत्रता हूँ
ओर वो जो बेधड़क मेरी नसों से गुजर गया वो विरोध मेरा प्रेमी है
मुझे लाज नही आती कहने में, लगभग हर रात हमबिस्तर रही हूँ उसके, ओर उन्ही अधजगी खूबसूरत रातो का परिणाम है वो मेरा जिगर का टुकडा विचलन
वो अभी छोटा है
बोल नही पाता रोता है चिलाता है ओर ऐसे ही अपनी व्यथा बता है
उसकी ये व्यथा कोई समझ नही पता लेकिन मै सब समझती हूँ आखिर माँ हूँ
वो अभी संघर्ष नही खा पाता इसलिए स्तनपान कराती हूँ केवल विचार ही पिलाती हू
वो बड़ा होकर परिवर्तन बनेगा
हमारा नाम रोशन करेगा
न उसे गाली मत देना वो मेरी नाजायज़ ओलाद नही प्रेम साधना है
विरोध ने उसे अभी नाकारा नही है वो मेरा बच्चा है आवारा नही है
उसे अनाथ भी मत कहना क्योकि मै अभी जिन्दा हूँ
ओर मै बता दू की अपने इस कृत्य पर मै शर्मिंदा नही हूँ
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बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
ReplyDeletebahaut accha... isse tarah nedar ho ke lekho....
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