कल कोई यहाँ आया था
बीती रात किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया था
कोई मुसाफिर रास्ता भूल गया था शायद
इतना निंदासा था की चोखट पर ही ढेर हो गयामंजिल भूल कर रस्ते पर ही सो गया
यही दरवाजे पर बैठी हु सुबह उठते ही रास्ता पूछेगा
मै न मिली तो बीती रात ओर मुझे दोनों को कोसेगा
कल कोई यहाँ आया था

भावपूर्ण कविता , बहुत सुन्दर , आज पढ़ा मैंने
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