Monday, March 16, 2009

कोई यहाँ आया था

कल कोई यहाँ आया था

बीती रात किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया था

कोई मुसाफिर रास्ता भूल गया था शायद

इतना निंदासा था की चोखट पर ही ढेर हो गयामंजिल भूल कर रस्ते पर ही सो गया

यही दरवाजे पर बैठी हु सुबह उठते ही रास्ता पूछेगा

मै न मिली तो बीती रात ओर मुझे दोनों को कोसेगा
कल कोई यहाँ आया था

1 comment:

  1. भावपूर्ण कविता , बहुत सुन्दर , आज पढ़ा मैंने

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